भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 14 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 14.14 · यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु
यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् ।
तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ॥
yadā sattve pravṛddhe tu pralayaṃ yāti dehabhṛt |
tadottamavidāṃ lokānamalānpratipadyate ||
हिन्दी अनुवाद
जब सत्त्व बढ़ा हुआ हो और उसी समय देही मृत्यु को प्राप्त हो, तब वह उत्तम ज्ञानियों के निर्मल लोकों को प्राप्त होता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 14.14 का अर्थ क्या है?
जब सत्त्व बढ़ा हुआ हो और उसी समय देही मृत्यु को प्राप्त हो, तब वह उत्तम ज्ञानियों के निर्मल लोकों को प्राप्त होता है।
भगवद्गीता 14.14 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।