भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 13 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 14.13 · अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च एव
अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च ।
तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥
aprakāśo’pravṛttiśca pramādo moha eva ca |
tamasyetāni jāyante vivṛddhe kurunandana ||
हिन्दी अनुवाद
हे कुरुनन्दन, तमोगुण के बढ़ने पर अँधेरा, निष्क्रियता, प्रमाद और मोह उत्पन्न होते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 14.13 का अर्थ क्या है?
हे कुरुनन्दन, तमोगुण के बढ़ने पर अँधेरा, निष्क्रियता, प्रमाद और मोह उत्पन्न होते हैं।
भगवद्गीता 14.13 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।