भगवद्गीता · अध्याय 12, श्लोक 13 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 12.13 · अद्वेष्टा सर्वभूतानां एव

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च ।
निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥

adveṣṭā sarvabhūtānāṃ maitraḥ karuṇa eva ca |
nirmamo nirahaṅkāraḥ samaduḥkhasukhaḥ kṣamī ||

हिन्दी अनुवाद

जो किसी प्राणी से द्वेष नहीं करता, सबका मित्र है और दयालु है; जो ममता और अहंकार से मुक्त है, सुख-दुःख में समान रहता है और क्षमाशील है —

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 12, भक्तियोग (भक्ति योग) में कहा है। इस अध्याय में 20 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 12.13 का अर्थ क्या है?

जो किसी प्राणी से द्वेष नहीं करता, सबका मित्र है और दयालु है; जो ममता और अहंकार से मुक्त है, सुख-दुःख में समान रहता है और क्षमाशील है —

भगवद्गीता 12.13 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 12, भक्तियोग (भक्ति योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।