भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 46 · अर्जुन

भगवद्गीता 11.46 · किरीटिनं गदिनं चक्रहस्त-

किरीटिनं गदिनं चक्रहस्त-
मिच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव ।
तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन
सहस्रबाहो भव विश्वमूर्ते ॥

kirīṭinaṃ gadinaṃ cakrahasta-
micchāmi tvāṃ draṣṭumahaṃ tathaiva |
tenaiva rūpeṇa caturbhujena
sahasrabāho bhava viśvamūrte ||

हिन्दी अनुवाद

मैं आपको पहले की तरह मुकुट धारण किए, गदा और चक्र हाथ में लिए देखना चाहता हूँ। हे सहस्रबाहो, हे विश्वमूर्ते, आप फिर से वही चतुर्भुज रूप धारण कीजिए।

प्रसंग

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 11.46 का अर्थ क्या है?

मैं आपको पहले की तरह मुकुट धारण किए, गदा और चक्र हाथ में लिए देखना चाहता हूँ। हे सहस्रबाहो, हे विश्वमूर्ते, आप फिर से वही चतुर्भुज रूप धारण कीजिए।

भगवद्गीता 11.46 किसने कहा है?

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।