भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 28 · अर्जुन
भगवद्गीता 11.28 · यथा नदीनां
यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः
समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति ।
तथा तवामी नरलोकवीरा
विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति ॥
yathā nadīnāṃ bahavo’mbuvegāḥ
samudramevābhimukhā dravanti |
tathā tavāmī naralokavīrā
viśanti vaktrāṇyabhivijvalanti ||
हिन्दी अनुवाद
जैसे नदियों की अनेक धाराएँ तेजी से समुद्र की ओर दौड़ती हैं, वैसे ही मनुष्य-लोक के ये वीर आपके धधकते मुखों में समा रहे हैं।
प्रसंग
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.28 का अर्थ क्या है?
जैसे नदियों की अनेक धाराएँ तेजी से समुद्र की ओर दौड़ती हैं, वैसे ही मनुष्य-लोक के ये वीर आपके धधकते मुखों में समा रहे हैं।
भगवद्गीता 11.28 किसने कहा है?
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।