भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 27 · अर्जुन

भगवद्गीता 11.27 · वक्त्राणि ते त्वरमाणा

वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति
दंष्ट्राकरालानि भयानकानि ।
केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु
संदृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः ॥

vaktrāṇi te tvaramāṇā viśanti
daṃṣṭrākarālāni bhayānakāni |
kecidvilagnā daśanāntareṣu
saṃdṛśyante cūrṇitairuttamāṅgaiḥ ||

हिन्दी अनुवाद

— बड़े वेग से आपके दाढ़ों वाले भयानक मुखों में प्रवेश कर रहे हैं। कुछ आपके दाँतों के बीच फँसे दिखाई दे रहे हैं, जिनके सिर चूर-चूर हो गए हैं।

प्रसंग

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 11.27 का अर्थ क्या है?

— बड़े वेग से आपके दाढ़ों वाले भयानक मुखों में प्रवेश कर रहे हैं। कुछ आपके दाँतों के बीच फँसे दिखाई दे रहे हैं, जिनके सिर चूर-चूर हो गए हैं।

भगवद्गीता 11.27 किसने कहा है?

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।