भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 23 · अर्जुन

भगवद्गीता 11.23 · रूपं महत्ते

रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रं
महाबाहो बहुबाहूरुपादम् ।
बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं
दृष्ट्वा लोकाः प्रव्यथितास्तथाहम् ॥

rūpaṃ mahatte bahuvaktranetraṃ
mahābāho bahubāhūrupādam |
bahūdaraṃ bahudaṃṣṭrākarālaṃ
dṛṣṭvā lokāḥ pravyathitāstathāham ||

हिन्दी अनुवाद

हे महाबाहो, अनेक मुखों और नेत्रों, अनेक भुजाओं, जंघाओं और चरणों, अनेक उदरों वाले और अनेक विकराल दाढ़ों से भयानक आपके इस विशाल रूप को देखकर सब लोक व्याकुल हैं — और मैं भी।

प्रसंग

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 11.23 का अर्थ क्या है?

हे महाबाहो, अनेक मुखों और नेत्रों, अनेक भुजाओं, जंघाओं और चरणों, अनेक उदरों वाले और अनेक विकराल दाढ़ों से भयानक आपके इस विशाल रूप को देखकर सब लोक व्याकुल हैं — और मैं भी।

भगवद्गीता 11.23 किसने कहा है?

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।