भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 22 · अर्जुन
भगवद्गीता 11.22 · रुद्रादित्या वसवो ये च
रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या
विश्वेऽश्विनौ मरुतश्चोष्मपाश्च ।
गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसंघा
वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे ॥
rudrādityā vasavo ye ca sādhyā
viśve’śvinau marutaścoṣmapāśca |
gandharvayakṣāsurasiddhasaṃghā
vīkṣante tvāṃ vismitāścaiva sarve ||
हिन्दी अनुवाद
रुद्र, आदित्य, वसु, साध्य, विश्वेदेव, दोनों अश्विनीकुमार, मरुत और पितर, तथा गन्धर्वों, यक्षों, असुरों और सिद्धों के समूह — सब विस्मित होकर आपको देख रहे हैं।
प्रसंग
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.22 का अर्थ क्या है?
रुद्र, आदित्य, वसु, साध्य, विश्वेदेव, दोनों अश्विनीकुमार, मरुत और पितर, तथा गन्धर्वों, यक्षों, असुरों और सिद्धों के समूह — सब विस्मित होकर आपको देख रहे हैं।
भगवद्गीता 11.22 किसने कहा है?
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।