भगवद्गीता · अध्याय 10, श्लोक 26 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 10.26 · अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां च

अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः ।
गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः ॥

aśvatthaḥ sarvavṛkṣāṇāṃ devarṣīṇāṃ ca nāradaḥ |
gandharvāṇāṃ citrarathaḥ siddhānāṃ kapilo muniḥ ||

हिन्दी अनुवाद

सब वृक्षों में मैं अश्वत्थ (पीपल) हूँ, देवर्षियों में नारद; गन्धर्वों में चित्ररथ हूँ और सिद्धों में कपिल मुनि।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 10.26 का अर्थ क्या है?

सब वृक्षों में मैं अश्वत्थ (पीपल) हूँ, देवर्षियों में नारद; गन्धर्वों में चित्ररथ हूँ और सिद्धों में कपिल मुनि।

भगवद्गीता 10.26 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।