भगवद्गीता · अध्याय 10, श्लोक 24 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 10.24 · पुरोधसां च मुख्यं मां
पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम् ।
सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः ॥
purodhasāṃ ca mukhyaṃ māṃ viddhi pārtha bṛhaspatim |
senānīnāmahaṃ skandaḥ sarasāmasmi sāgaraḥ ||
हिन्दी अनुवाद
हे पार्थ, पुरोहितों में मुझे उनका मुखिया बृहस्पति जानो; सेनापतियों में मैं स्कन्द हूँ और जलाशयों में सागर।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 10.24 का अर्थ क्या है?
हे पार्थ, पुरोहितों में मुझे उनका मुखिया बृहस्पति जानो; सेनापतियों में मैं स्कन्द हूँ और जलाशयों में सागर।
भगवद्गीता 10.24 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।