भगवद्गीता · अध्याय 10, श्लोक 19 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 10.19 · हन्त ते कथयिष्यामि
हन्त ते कथयिष्यामि दिव्या ह्यात्मविभूतयः ।
प्राधान्यतः कुरुश्रेष्ठ नास्त्यन्तो विस्तरस्य मे ॥
hanta te kathayiṣyāmi divyā hyātmavibhūtayaḥ |
prādhānyataḥ kuruśreṣṭha nāstyanto vistarasya me ||
हिन्दी अनुवाद
श्रीभगवान बोले: अच्छा, हे कुरुश्रेष्ठ, मैं तुम्हें अपनी दिव्य विभूतियाँ बताता हूँ — पर केवल प्रमुख-प्रमुख; क्योंकि मेरे विस्तार का कोई अन्त नहीं है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 10.19 का अर्थ क्या है?
श्रीभगवान बोले: अच्छा, हे कुरुश्रेष्ठ, मैं तुम्हें अपनी दिव्य विभूतियाँ बताता हूँ — पर केवल प्रमुख-प्रमुख; क्योंकि मेरे विस्तार का कोई अन्त नहीं है।
भगवद्गीता 10.19 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।