भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 39 · अर्जुन
भगवद्गीता 1.39 · कथं न ज्ञेयमस्माभिः
कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम् ।
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥
kathaṃ na jñeyamasmābhiḥ pāpādasmānnivartitum |
kulakṣayakṛtaṃ doṣaṃ prapaśyadbhirjanārdana ||
हिन्दी अनुवाद
— फिर भी हे जनार्दन, कुल-नाश के दोष को साफ़ देखने वाले हम लोग इस पाप से पीछे हटना क्यों न सीखें?
प्रसंग
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 1.39 का अर्थ क्या है?
— फिर भी हे जनार्दन, कुल-नाश के दोष को साफ़ देखने वाले हम लोग इस पाप से पीछे हटना क्यों न सीखें?
भगवद्गीता 1.39 किसने कहा है?
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।