भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 17 · संजय

भगवद्गीता 1.17 · काश्यश्च परमेष्वासः च

काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः ।
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ॥

kāśyaśca parameṣvāsaḥ śikhaṇḍī ca mahārathaḥ |
dhṛṣṭadyumno virāṭaśca sātyakiścāparājitaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

श्रेष्ठ धनुर्धर काशिराज, महारथी शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, विराट और कभी न हारने वाले सात्यकि, —

प्रसंग

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.17 का अर्थ क्या है?

श्रेष्ठ धनुर्धर काशिराज, महारथी शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, विराट और कभी न हारने वाले सात्यकि, —

भगवद्गीता 1.17 किसने कहा है?

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।