पूजा विधि · माँ पार्वती, भगवान शिव, गणेश और चंद्रमा
करवा चौथ पूजा विधि
करवा चौथ पर विवाहित महिलाएँ पति की लंबी आयु और कुशलता के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं। दिन की शुरुआत भोर से पहले सरगी से होती है और समापन करवे (मिट्टी के पात्र) के साथ शाम की पूजा, करवा चौथ कथा, और छलनी से चाँद के पहले दर्शन से होता है।
कब करें: सूर्योदय से व्रत; प्रदोष काल में शाम की पूजा; चंद्रोदय पर व्रत का पारण — नीचे नई दिल्ली के लिए गणना दी गई है।
करवा चौथ · 18 अक्टूबर 2027 · नई दिल्ली
| संध्या पूजा (प्रदोष) | 17:48 – 20:19 |
|---|---|
| चंद्रोदय (व्रत खोलें) | 19:30 |
समय आपके शहर के अनुसार बदलता है। अपने शहर का पंचांग देखें।
पूजा सामग्री
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प्रसाद और नैवेद्य
मिठाइयाँ, मठरी, और व्रत के बाद का विशेष भोजन।
मंत्र
ॐ — मंत्र जाप काउंटर के साथ
पूजा विधि: चरण-दर-चरण
सूर्योदय से पहले सरगी
सास द्वारा दी गई सरगी भोर से पहले खाएँ, फिर व्रत शुरू करें — बहुत-सी महिलाएँ इसे बिना जल के (निर्जला) रखती हैं।
शाम की तैयारी
मेहंदी लगाएँ और त्योहार के या दुल्हन जैसे कपड़े पहनें। पूजा की थाली और करवा सजाएँ।
शाम की पूजा और कथा
महिलाएँ एक साथ मिलकर गौरी, शिव और गणेश की पूजा करती हैं, फिर करवा चौथ की कथा सुनती हैं, और गीत गाते हुए थालियों को घेरे में सात बार एक-दूसरे को आगे बढ़ाती हैं (थाली फेरना)।
चाँद की प्रतीक्षा
चाँद निकलने पर पास में दीया रखकर छलनी से उसे देखें, फिर उसी छलनी से अपने पति को देखें।
चंद्रमा को अर्घ्य
करवे से चंद्रमा को जल अर्पित करें और पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करें।
व्रत का पारण
पति के हाथ से पानी का पहला घूँट और मिठाई का पहला कौर लें, फिर साथ में त्योहार का भोजन करें।
ध्यान रखने योग्य बातें
- गर्भवती महिलाओं, बुज़ुर्गों और किसी भी स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए; परंपरा में भी उन्हें निर्जला व्रत से छूट दी गई है।
- चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है — अपने स्थान के लिए पंचांग देखें।
- आजकल बहुत से दंपती साथ मिलकर व्रत रखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
करवा चौथ 2027 कब है?
करवा चौथ सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 को है (नई दिल्ली)। चंद्रोदय (व्रत खोलें): 19:30।
अगर चाँद बादलों में छिपा हो तो क्या करें?
परिवार आम तौर पर पंचांग में दिए चंद्रोदय के समय तक प्रतीक्षा करते हैं और चंद्रमा की दिशा की ओर मुख करके व्रत खोलते हैं, या अपने बड़ों के रिवाज का पालन करते हैं।
सरगी क्या है?
सास द्वारा दिया जाने वाला भोर से पहले का भोजन और उपहार, जिसे दिन भर के व्रत की शक्ति के लिए सूर्योदय से पहले खाया जाता है।