पूजा विधि · श्रीकृष्ण (बाल गोपाल)

जन्माष्टमी पूजा विधि (आधी रात की कृष्ण पूजा)

श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में आधी रात को हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी पर भक्त दिन भर व्रत रखते हैं और निशीथ काल में बाल कृष्ण (लड्डू गोपाल) की छोटी प्रतिमा का अभिषेक करके उनका जन्मोत्सव मनाते हैं; फिर उन्हें सजाकर सुंदर पालने में बैठाया जाता है और छप्पन या उससे अधिक व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।

समर्पितश्रीकृष्ण (बाल गोपाल)
समयआधी रात के आसपास 45 मिनट
अगली तिथि (नई दिल्ली)मंगल, 24 अग॰ 2027

कब करें: जन्माष्टमी की आधी रात — निशीथ काल की गणना नीचे नई दिल्ली के लिए दी गई है।

कृष्ण जन्माष्टमी · 24 अगस्त 2027 · नई दिल्ली

निशीथ काल (मध्यरात्रि पूजा)00:01 (25 अग॰) – 00:45 (25 अग॰)

समय आपके शहर के अनुसार बदलता है। अपने शहर का पंचांग देखें।

पूजा सामग्री

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प्रसाद और नैवेद्य

माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचामृत, और दूध से बनी मिठाइयाँ।

आरती और स्तोत्र

मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — मंत्र जाप काउंटर के साथ

पूजा विधि: चरण-दर-चरण

  1. व्रत और सजावट

    दिन भर व्रत रखें (बहुत से लोग अन्न नहीं खाते), और पूजा स्थान व पालने को फूलों से सजाएँ। शाम को भजन गाएँ और श्रीकृष्ण की कथाएँ सुनाएँ।

  2. आधी रात का जन्म

    निशीथ काल में शंख बजाकर और घंटियाँ बजाकर जन्म की घोषणा करें, और बाल कृष्ण को पालने में लाएँ।

  3. अभिषेक

    उनके मंत्र का जाप करते हुए प्रतिमा को पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर — से और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएँ।

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

    मंत्र जाप काउंटर से जप करें →

  4. श्रृंगार

    प्रतिमा को धीरे से पोंछें, कृष्ण को नए वस्त्र पहनाएँ, मुकुट, मोरपंख और बाँसुरी सजाएँ, और चंदन लगाएँ।

  5. भोग अर्पण

    ये चरण पारंपरिक षोडशोपचार पूजा के अनुसार हैं — वे सोलह उपचार, जिनसे देवता का अतिथि की तरह स्वागत और सत्कार किया जाता है। हर भोग के साथ तुलसी दल अर्पित करें — माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाइयाँ (कई घरों में छप्पन भोग, यानी छप्पन व्यंजन)।

  6. पालना झुलाएँ और आरती करें

    गाते हुए पालने को धीरे-धीरे झुलाएँ, फिर आरती करें। मधुराष्टकम का पाठ करें या भजन गाएँ।

  7. व्रत का पारण

    पारिवारिक रिवाज के अनुसार आधी रात की पूजा के बाद प्रसाद से, या अगली सुबह व्रत खोलें।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • श्रीकृष्ण को हर अर्पण के साथ तुलसी अवश्य होनी चाहिए।
  • स्मार्त और वैष्णव (इस्कॉन) पंचांग कभी-कभी जन्माष्टमी लगातार दो दिनों में मनाते हैं — अपने समुदाय की तिथि का पालन करें।
  • महाराष्ट्र में अगले दिन दही हांडी मनाई जाती है।
पूजा की परंपराएँ क्षेत्र, समुदाय और परिवार के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह गाइड घरों में प्रचलित सामान्य विधि बताती है; जहाँ आपकी पारिवारिक परंपरा अलग हो, वहाँ बड़ों या पुरोहित की सलाह मानें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृष्ण जन्माष्टमी 2027 कब है?

कृष्ण जन्माष्टमी मंगलवार, 24 अगस्त 2027 को है (नई दिल्ली)। निशीथ काल (मध्यरात्रि पूजा): 00:01 (25 अग॰) – 00:45 (25 अग॰)।

छप्पन भोग क्या है?

छप्पन व्यंजनों का भोग, जो उस कथा की याद दिलाता है कि श्रीकृष्ण दिन में आठ बार भोजन करते थे, और गोवर्धन पर्वत उठाए रखने के कारण सात दिन तक भोजन नहीं कर पाए।

क्या व्रत आधी रात से पहले खोला जा सकता है?

रिवाज अलग-अलग हैं; बहुत से लोग फल और दूध पर व्रत रखते हैं और आधी रात के जन्मोत्सव के बाद ही उसे खोलते हैं।

AstroMandap संपादकीय टीम · अपडेट: · संपादकीय मानक (अंग्रेज़ी)