पूजा विधि · आपके इष्ट देवता
घर पर रोज़ की पूजा
घर के पूजा स्थान पर रोज़ की छोटी-सी पूजा हिंदू गृहस्थ की उपासना का केंद्र है। इसका बहुत विस्तृत होना ज़रूरी नहीं: एक साफ़ जगह, एक दीपक, एक फूल और कुछ मिनट का सच्चा ध्यान काफ़ी है। इस सरल विधि में पंचोपचार यानी पाँच उपचार अर्पित किए जाते हैं — गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य।
कब करें: परंपरा के अनुसार सुबह स्नान के बाद, और फिर शाम को संध्या दीप जलाते समय। पूजा कितनी लंबी है, इससे ज़्यादा ज़रूरी है कि वह नियमित हो।
पूजा सामग्री
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प्रसाद और नैवेद्य
प्रेम से अर्पित कोई भी सादा, ताज़ा, शाकाहारी भोजन — फल, मिश्री, गुड़ या कोई मिठाई।
आरती और स्तोत्र
मंत्र
ॐ — मंत्र जाप काउंटर के साथ
पूजा विधि: चरण-दर-चरण
स्वयं को और स्थान को तैयार करें
स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। पूजा स्थान साफ़ करें, कल के फूल हटा दें, और हो सके तो पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
आचमन — शुद्धि
दाहिनी हथेली से तीन बार थोड़ा-थोड़ा जल पिएँ, और अपने ऊपर तथा पूजा सामग्री पर थोड़ा जल छिड़कें।
दीपक जलाएँ
पूजा के साक्षी दीपक को जलाएँ और उसे प्रणाम करें।
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसम्पदा ।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते ॥गणेश जी का स्मरण
हर पूजा की शुरुआत विघ्नहर्ता गणेश जी के स्मरण से करें।
ॐ गं गणपतये नमः
पंचोपचार — पाँच उपचार
देवता के नाम मंत्र का जाप करते हुए एक-एक करके अर्पित करें: चंदन या कुमकुम (गंध), फूल, धूप, दीपक (देवता को दिखाएँ) और नैवेद्य (भोजन)। भोग लगाने के बाद उसके चारों ओर थोड़ा जल छिड़कें और कुछ क्षण उसे देवता के सामने रहने दें।
प्रार्थना और जाप
अपनी रोज़ की प्रार्थना या कुछ श्लोक पढ़ें, या अपने चुने हुए मंत्र का जाप करें — उदाहरण के लिए 108 मनकों की एक माला।
आरती
घंटी बजाते हुए और “ॐ जय जगदीश हरे” जैसी कोई आरती गाते हुए देवता के सामने दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
समापन
प्रणाम करें, किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें, और प्रसाद परिवार के साथ बाँटें।
ध्यान रखने योग्य बातें
- ऐसा भोजन कभी अर्पित न करें जिसे आप पहले चख चुके हों।
- दीपक को स्थिर थाली में, पर्दों से दूर रखें, और जलते दीपक को कभी अकेला न छोड़ें।
- अगर समय कम हो, तो एक मंत्र के साथ दीपक जलाना और प्रणाम करना भी भक्ति का पूरा कर्म है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पंडित जी के बिना पूजा कर सकते हैं?
हाँ। घर की रोज़ की पूजा हमेशा से परिवार के लोग ख़ुद करते आए हैं। पंडित जी को परंपरागत रूप से संस्कारों और बड़े अनुष्ठानों के लिए बुलाया जाता है।
अगर मुझे संस्कृत नहीं आती तो?
देवता के नाम और अपने शब्दों के साथ पूजा के चरण पूरे करें। सबसे ज़्यादा मायने अर्पण की सच्चाई रखती है।