भगवद्गीता · अध्याय 9, श्लोक 2 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 9.2 · राजविद्या राजगुह्यं

राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम् ।
प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुसुखं कर्तुमव्ययम् ॥

rājavidyā rājaguhyaṃ pavitramidamuttamam |
pratyakṣāvagamaṃ dharmyaṃ susukhaṃ kartumavyayam ||

हिन्दी अनुवाद

यह सब विद्याओं का राजा और सब रहस्यों का राजा है, परम पवित्र करने वाला है। इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सकता है; यह धर्म के अनुकूल है, आचरण में अत्यन्त सरल है और अविनाशी है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 9.2 का अर्थ क्या है?

यह सब विद्याओं का राजा और सब रहस्यों का राजा है, परम पवित्र करने वाला है। इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सकता है; यह धर्म के अनुकूल है, आचरण में अत्यन्त सरल है और अविनाशी है।

भगवद्गीता 9.2 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।