भगवद्गीता · अध्याय 5, श्लोक 14 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 5.14 · न कर्तृत्वं न कर्माणि

न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः ।
न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते ॥

na kartṛtvaṃ na karmāṇi lokasya sṛjati prabhuḥ |
na karmaphalasaṃyogaṃ svabhāvastu pravartate ||

हिन्दी अनुवाद

प्रभु (आत्मा) संसार के लिए न कर्तापन रचता है, न कर्म, न कर्म और फल का संयोग। यह सब स्वभाव (प्रकृति) से ही चलता है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 5, कर्मसंन्यासयोग (कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 29 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 5.14 का अर्थ क्या है?

प्रभु (आत्मा) संसार के लिए न कर्तापन रचता है, न कर्म, न कर्म और फल का संयोग। यह सब स्वभाव (प्रकृति) से ही चलता है।

भगवद्गीता 5.14 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 5, कर्मसंन्यासयोग (कर्म-संन्यास योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।