भगवद्गीता · अध्याय 5, श्लोक 12 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 5.12 · युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा
युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम् ।
अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते ॥
yuktaḥ karmaphalaṃ tyaktvā śāntimāpnoti naiṣṭhikīm |
ayuktaḥ kāmakāreṇa phale sakto nibadhyate ||
हिन्दी अनुवाद
योग से युक्त व्यक्ति कर्म के फल को त्यागकर स्थायी शांति पाता है; पर जो योग से युक्त नहीं, वह कामना के कारण फल में आसक्त होकर बँध जाता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 5, कर्मसंन्यासयोग (कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 29 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 5.12 का अर्थ क्या है?
योग से युक्त व्यक्ति कर्म के फल को त्यागकर स्थायी शांति पाता है; पर जो योग से युक्त नहीं, वह कामना के कारण फल में आसक्त होकर बँध जाता है।
भगवद्गीता 5.12 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 5, कर्मसंन्यासयोग (कर्म-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।