भगवद्गीता · अध्याय 17, श्लोक 23 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 17.23 · ॐतत्सदिति निर्देशो
ॐतत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः ।
ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यज्ञाश्च विहिताः पुरा ॥
oṃtatsaditi nirdeśo brahmaṇastrividhaḥ smṛtaḥ |
brāhmaṇāstena vedāśca yajñāśca vihitāḥ purā ||
हिन्दी अनुवाद
“ॐ तत् सत्” — ये तीन शब्द ब्रह्म के नाम माने गए हैं। इन्हीं से प्राचीन काल में ब्राह्मण, वेद और यज्ञ रचे गए।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 17, श्रद्धात्रयविभागयोग (श्रद्धात्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 17.23 का अर्थ क्या है?
“ॐ तत् सत्” — ये तीन शब्द ब्रह्म के नाम माने गए हैं। इन्हीं से प्राचीन काल में ब्राह्मण, वेद और यज्ञ रचे गए।
भगवद्गीता 17.23 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 17, श्रद्धात्रयविभागयोग (श्रद्धात्रय विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।