भगवद्गीता · अध्याय 15, श्लोक 20 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 15.20 · इति गुह्यतमं मयानघ
इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ ।
एतद्बुद्ध्वा बुद्धिमान्स्यात्कृतकृत्यश्च भारत ॥
iti guhyatamaṃ śāstramidamuktaṃ mayānagha |
etadbuddhvā buddhimānsyātkṛtakṛtyaśca bhārata ||
हिन्दी अनुवाद
हे निष्पाप, इस प्रकार मैंने तुम्हें यह अत्यन्त गुप्त शास्त्र बताया। हे भारत, इसे समझकर मनुष्य बुद्धिमान और कृतार्थ हो जाता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 15, पुरुषोत्तमयोग (पुरुषोत्तम योग) में कहा है। इस अध्याय में 20 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 15.20 का अर्थ क्या है?
हे निष्पाप, इस प्रकार मैंने तुम्हें यह अत्यन्त गुप्त शास्त्र बताया। हे भारत, इसे समझकर मनुष्य बुद्धिमान और कृतार्थ हो जाता है।
भगवद्गीता 15.20 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 15, पुरुषोत्तमयोग (पुरुषोत्तम योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।