भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 25 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 13.25 · अन्ये त्वेवमजानन्तः

अन्ये त्वेवमजानन्तः श्रुत्वान्येभ्य उपासते ।
तेऽपि चातितरन्त्येव मृत्युं श्रुतिपरायणाः ॥

anye tvevamajānantaḥ śrutvānyebhya upāsate |
te’pi cātitarantyeva mṛtyuṃ śrutiparāyaṇāḥ ||

हिन्दी अनुवाद

कुछ लोग यह सब स्वयं न जानकर दूसरों से सुनकर उपासना करते हैं। सुने हुए उपदेश के प्रति निष्ठा रखने वाले वे भी मृत्यु के पार चले जाते हैं।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 13.25 का अर्थ क्या है?

कुछ लोग यह सब स्वयं न जानकर दूसरों से सुनकर उपासना करते हैं। सुने हुए उपदेश के प्रति निष्ठा रखने वाले वे भी मृत्यु के पार चले जाते हैं।

भगवद्गीता 13.25 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।