भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 33 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 11.33 · तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो

तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व
जित्वा शत्रून् भुङ्क्ष्व राज्यं समृद्धम् ।
मयैवैते निहताः पूर्वमेव
निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन् ॥

tasmāttvamuttiṣṭha yaśo labhasva
jitvā śatrūn bhuṅkṣva rājyaṃ samṛddham |
mayaivaite nihatāḥ pūrvameva
nimittamātraṃ bhava savyasācin ||

हिन्दी अनुवाद

इसलिए तुम उठो और यश प्राप्त करो। शत्रुओं को जीतकर समृद्ध राज्य का भोग करो। ये सब तो मेरे द्वारा पहले ही मारे जा चुके हैं; हे सव्यसाची, तुम केवल निमित्त बन जाओ।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 11.33 का अर्थ क्या है?

इसलिए तुम उठो और यश प्राप्त करो। शत्रुओं को जीतकर समृद्ध राज्य का भोग करो। ये सब तो मेरे द्वारा पहले ही मारे जा चुके हैं; हे सव्यसाची, तुम केवल निमित्त बन जाओ।

भगवद्गीता 11.33 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।