भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 3 · अर्जुन

भगवद्गीता 11.3 · एवमेतद्यथात्थ परमेश्वर

एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर ।
द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम ॥

evametadyathāttha tvamātmānaṃ parameśvara |
draṣṭumicchāmi te rūpamaiśvaraṃ puruṣottama ||

हिन्दी अनुवाद

हे परमेश्वर, आप अपने विषय में जैसा कहते हैं, वैसा ही है। फिर भी, हे पुरुषोत्तम, मैं आपके ईश्वरीय रूप को देखना चाहता हूँ।

प्रसंग

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 11.3 का अर्थ क्या है?

हे परमेश्वर, आप अपने विषय में जैसा कहते हैं, वैसा ही है। फिर भी, हे पुरुषोत्तम, मैं आपके ईश्वरीय रूप को देखना चाहता हूँ।

भगवद्गीता 11.3 किसने कहा है?

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।