भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 14 · संजय
भगवद्गीता 11.14 · ततः स विस्मयाविष्टो
ततः स विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनंजयः ।
प्रणम्य शिरसा देवं कृताञ्जलिरभाषत ॥
tataḥ sa vismayāviṣṭo hṛṣṭaromā dhanaṃjayaḥ |
praṇamya śirasā devaṃ kṛtāñjalirabhāṣata ||
हिन्दी अनुवाद
तब आश्चर्य से भरे, रोमांचित धनञ्जय ने उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम किया और हाथ जोड़कर कहा।
प्रसंग
यह श्लोक संजय ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.14 का अर्थ क्या है?
तब आश्चर्य से भरे, रोमांचित धनञ्जय ने उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम किया और हाथ जोड़कर कहा।
भगवद्गीता 11.14 किसने कहा है?
यह श्लोक संजय ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।