भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 11 · संजय
भगवद्गीता 11.11 · दिव्यमाल्याम्बरधरं
दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् ।
सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम् ॥
divyamālyāmbaradharaṃ divyagandhānulepanam |
sarvāścaryamayaṃ devamanantaṃ viśvatomukham ||
हिन्दी अनुवाद
— जो दिव्य मालाएँ और वस्त्र धारण किए था, दिव्य सुगन्धों से अनुलिप्त था; वह सब आश्चर्यों से भरा, अनन्त, सब ओर मुख वाला परमदेव था।
प्रसंग
यह श्लोक संजय ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 11.11 का अर्थ क्या है?
— जो दिव्य मालाएँ और वस्त्र धारण किए था, दिव्य सुगन्धों से अनुलिप्त था; वह सब आश्चर्यों से भरा, अनन्त, सब ओर मुख वाला परमदेव था।
भगवद्गीता 11.11 किसने कहा है?
यह श्लोक संजय ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।