भगवद्गीता · अध्याय 11, श्लोक 1 · अर्जुन

भगवद्गीता 11.1 · मदनुग्रहाय परमं

मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम् ।
यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥

madanugrahāya paramaṃ guhyamadhyātmasaṃjñitam |
yattvayoktaṃ vacastena moho’yaṃ vigato mama ||

हिन्दी अनुवाद

अर्जुन बोले: मुझ पर अनुग्रह करके आपने आत्म-तत्त्व के विषय में जो परम गोपनीय उपदेश दिया है, उन वचनों से मेरा मोह दूर हो गया है।

प्रसंग

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है। इस अध्याय में 55 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 11.1 का अर्थ क्या है?

अर्जुन बोले: मुझ पर अनुग्रह करके आपने आत्म-तत्त्व के विषय में जो परम गोपनीय उपदेश दिया है, उन वचनों से मेरा मोह दूर हो गया है।

भगवद्गीता 11.1 किसने कहा है?

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 11, विश्वरूपदर्शनयोग (विश्वरूप दर्शन योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।