भगवद्गीता · अध्याय 10, श्लोक 1 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 10.1 · भूय एव महाबाहो शृणु मे

भूय एव महाबाहो शृणु मे परमं वचः ।
यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ॥

bhūya eva mahābāho śṛṇu me paramaṃ vacaḥ |
yatte’haṃ prīyamāṇāya vakṣyāmi hitakāmyayā ||

हिन्दी अनुवाद

श्रीभगवान बोले: हे महाबाहो, मेरे परम वचन को फिर से सुनो। तुम इसे सुनकर प्रसन्न होते हो, इसलिए तुम्हारे हित की इच्छा से मैं इसे कहता हूँ।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 10.1 का अर्थ क्या है?

श्रीभगवान बोले: हे महाबाहो, मेरे परम वचन को फिर से सुनो। तुम इसे सुनकर प्रसन्न होते हो, इसलिए तुम्हारे हित की इच्छा से मैं इसे कहता हूँ।

भगवद्गीता 10.1 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।