भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 5 · संजय

भगवद्गीता 1.5 · धृष्टकेतुश्चेकितानः

धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान् ।
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः ॥

dhṛṣṭaketuścekitānaḥ kāśirājaśca vīryavān |
purujitkuntibhojaśca śaibyaśca narapuṅgavaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

— धृष्टकेतु, चेकितान और वीर काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य, —

प्रसंग

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.5 का अर्थ क्या है?

— धृष्टकेतु, चेकितान और वीर काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य, —

भगवद्गीता 1.5 किसने कहा है?

यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।