भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 43 · अर्जुन
भगवद्गीता 1.43 · दोषैरेतैः कुलघ्नानां
दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसंकरकारकैः ।
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः ॥
doṣairetaiḥ kulaghnānāṃ varṇasaṃkarakārakaiḥ |
utsādyante jātidharmāḥ kuladharmāśca śāśvatāḥ ||
हिन्दी अनुवाद
कुल का नाश करने वालों के इन दोषों से, जो वर्णसंकर को जन्म देते हैं, सनातन जाति-धर्म और कुल-धर्म उजड़ जाते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 1.43 का अर्थ क्या है?
कुल का नाश करने वालों के इन दोषों से, जो वर्णसंकर को जन्म देते हैं, सनातन जाति-धर्म और कुल-धर्म उजड़ जाते हैं।
भगवद्गीता 1.43 किसने कहा है?
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।