भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 36 · अर्जुन

भगवद्गीता 1.36 · निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः

निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन ।
पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः ॥

nihatya dhārtarāṣṭrānnaḥ kā prītiḥ syājjanārdana |
pāpamevāśrayedasmānhatvaitānātatāyinaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

हे जनार्दन, धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता मिलेगी? ये आततायी ही सही, इन्हें मारकर हमें पाप ही लगेगा।

प्रसंग

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.36 का अर्थ क्या है?

हे जनार्दन, धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता मिलेगी? ये आततायी ही सही, इन्हें मारकर हमें पाप ही लगेगा।

भगवद्गीता 1.36 किसने कहा है?

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।