भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 34 · अर्जुन

भगवद्गीता 1.34 · आचार्याः पितरः च

आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः ।
मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः संबन्धिनस्तथा ॥

ācāryāḥ pitaraḥ putrāstathaiva ca pitāmahāḥ |
mātulāḥ śvaśurāḥ pautrāḥ śyālāḥ saṃbandhinastathā ||

हिन्दी अनुवाद

— गुरुजन, ताऊ-चाचा, पुत्र, दादा, मामा, ससुर, पौत्र, साले और दूसरे सम्बन्धी।

प्रसंग

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.34 का अर्थ क्या है?

— गुरुजन, ताऊ-चाचा, पुत्र, दादा, मामा, ससुर, पौत्र, साले और दूसरे सम्बन्धी।

भगवद्गीता 1.34 किसने कहा है?

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।