भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 31 · अर्जुन

भगवद्गीता 1.31 · निमित्तानि च पश्यामि

निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव ।
न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे ॥

nimittāni ca paśyāmi viparītāni keśava |
na ca śreyo’nupaśyāmi hatvā svajanamāhave ||

हिन्दी अनुवाद

हे केशव, मुझे शकुन भी उलटे दिखाई दे रहे हैं। युद्ध में अपने ही स्वजनों को मारकर मुझे कोई भलाई नहीं दिखती।

प्रसंग

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.31 का अर्थ क्या है?

हे केशव, मुझे शकुन भी उलटे दिखाई दे रहे हैं। युद्ध में अपने ही स्वजनों को मारकर मुझे कोई भलाई नहीं दिखती।

भगवद्गीता 1.31 किसने कहा है?

यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।