भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 29 · अर्जुन
भगवद्गीता 1.29 · सीदन्ति मम गात्राणि मुखं
सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति ।
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ॥
sīdanti mama gātrāṇi mukhaṃ ca pariśuṣyati |
vepathuśca śarīre me romaharṣaśca jāyate ||
हिन्दी अनुवाद
— मेरे अंग ढीले पड़ रहे हैं, मुँह सूख रहा है, शरीर काँप रहा है और रोंगटे खड़े हो रहे हैं।
प्रसंग
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 1.29 का अर्थ क्या है?
— मेरे अंग ढीले पड़ रहे हैं, मुँह सूख रहा है, शरीर काँप रहा है और रोंगटे खड़े हो रहे हैं।
भगवद्गीता 1.29 किसने कहा है?
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।