भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 23 · अर्जुन
भगवद्गीता 1.23 · योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य
योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः ।
धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः ॥
yotsyamānānavekṣe’haṃ ya ete’tra samāgatāḥ |
dhārtarāṣṭrasya durbuddheryuddhe priyacikīrṣavaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
मैं उन्हें देखना चाहता हूँ जो दुर्बुद्धि दुर्योधन का भला करने की इच्छा से यहाँ लड़ने के लिए जुटे हैं।
प्रसंग
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 1.23 का अर्थ क्या है?
मैं उन्हें देखना चाहता हूँ जो दुर्बुद्धि दुर्योधन का भला करने की इच्छा से यहाँ लड़ने के लिए जुटे हैं।
भगवद्गीता 1.23 किसने कहा है?
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।