भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 13 · संजय
भगवद्गीता 1.13 · ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च
ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः ।
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ॥
tataḥ śaṅkhāśca bheryaśca paṇavānakagomukhāḥ |
sahasaivābhyahanyanta sa śabdastumulo’bhavat ||
हिन्दी अनुवाद
इसके बाद शंख, नगाड़े, ढोल, मृदंग और नरसिंघे एक साथ बज उठे; वह कोलाहल बड़ा भयंकर था।
प्रसंग
यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 1.13 का अर्थ क्या है?
इसके बाद शंख, नगाड़े, ढोल, मृदंग और नरसिंघे एक साथ बज उठे; वह कोलाहल बड़ा भयंकर था।
भगवद्गीता 1.13 किसने कहा है?
यह श्लोक संजय ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।