भगवद्गीता · अध्याय 1, श्लोक 1 · धृतराष्ट्र

भगवद्गीता 1.1 · धर्मक्षेत्रे समवेता

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः ।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ॥

dharmakṣetre kurukṣetre samavetā yuyutsavaḥ |
māmakāḥ pāṇḍavāścaiva kimakurvata sañjaya ||

हिन्दी अनुवाद

धृतराष्ट्र बोले: हे संजय, धर्म की भूमि कुरुक्षेत्र में लड़ने के लिए जुटे मेरे बेटों और पाण्डु के बेटों ने वहाँ क्या किया?

प्रसंग

यह श्लोक धृतराष्ट्र ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 1.1 का अर्थ क्या है?

धृतराष्ट्र बोले: हे संजय, धर्म की भूमि कुरुक्षेत्र में लड़ने के लिए जुटे मेरे बेटों और पाण्डु के बेटों ने वहाँ क्या किया?

भगवद्गीता 1.1 किसने कहा है?

यह श्लोक धृतराष्ट्र ने अध्याय 1, अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का विषाद) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।