त्योहार
बैसाखी / विशु / पुथांडु (मेष संक्रांति)
मेष संक्रांति — अप्रैल के मध्य में सूर्य का निरयण मेष राशि में प्रवेश — भारत के बड़े हिस्से में सौर नववर्ष है और अलग-अलग क्षेत्रीय नामों से मनाई जाती है।
बैसाखी / विशु / पुथांडु (मेष संक्रांति) की तिथि
| 2026 | |
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| 2027 |
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अन्य नाम: वैसाखी (पंजाब), विशु (केरल), पुथांडु (तमिलनाडु), पोइला बोइशाख (बंगाल), बोहाग बिहू (असम), पना संक्रांति (ओडिशा)।
कथा और महत्व
पंजाब में बैसाखी वसंत की फसल का त्योहार है और सिखों के लिए 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा की स्थापना की याद दिलाती है। केरल में विशु की शुरुआत विशुक्कणि से होती है — शुभ वस्तुओं की एक सजावट, जिसे सुबह सबसे पहले देखा जाता है।
बैसाखी / विशु / पुथांडु (मेष संक्रांति) कैसे मनाया जाता है
- पंजाब में फसल का उत्सव और भांगड़ा
- केरल में विशुक्कणि और विशु कैनीट्टम (बच्चों को पैसे का उपहार)
- तमिलनाडु और बंगाल में नववर्ष के भोज और पंचांग का पाठ
- नदियों में पवित्र स्नान
परंपराएँ क्षेत्र, समुदाय और परिवार के अनुसार अलग-अलग होती हैं। पूजा और समय के लिए अपने कुल-पुरोहित या स्थानीय मंदिर का मार्गदर्शन लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बैसाखी / विशु / पुथांडु (मेष संक्रांति) 2026 कब है?
बैसाखी / विशु / पुथांडु (मेष संक्रांति) 2026 में मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को है (नई दिल्ली के अनुसार)।
बैसाखी / विशु / पुथांडु (मेष संक्रांति) 2027 कब है?
बैसाखी / विशु / पुथांडु (मेष संक्रांति) 2027 में बुधवार, 14 अप्रैल 2027 को है (नई दिल्ली के अनुसार)।
बैसाखी / विशु / पुथांडु (मेष संक्रांति) की तारीख हर साल क्यों बदलती है?
बैसाखी / विशु / पुथांडु (मेष संक्रांति) सूर्य की गति से तय होता है, इसलिए यह लगभग हर साल एक ही तारीख को पड़ता है; संक्रांति के समय के कारण कभी-कभी एक दिन का अंतर आ जाता है।